Founder Message


संथापक सन्देश


देश के प्रत्येक व्यक्ति के लिए शिक्षा-ग्रहण करना, जीवन का मूलभूत अधिकार है एवं प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिये अनिवार्य है | शिक्षा व्यक्ति के जीवन की आधार-शिला है | शिक्षा ही मनुष्य की कल्पना-शक्ति और संकल्प को द्रढता प्रदान करती है मानव -जीवन के आयाम का विस्तार करती है, तभी तो आज के युग में मानव ने ऐसी उपलब्धियाँ हासिल की है जिससे वह स्वयं चमत्कृत है । ये सभी उपलब्धियाँ शिक्षा के ही परिणाम है, जिस कारण मानव की कल्पना-शक्ति ने विज्ञानं को चुनौती देकर अपने कल्पनाओ को साकार किया है । शिक्षा मनुष्य को विचारशील, कल्पनाशील और विनर्म बनाती है । कहा भी गया है - "विद्या ददाति विनयं "
     शिक्षण संस्थान के शिक्षको का भी यह कर्त्तव्य बनता है कि वे अपने छात्रों को बिना भेद - भाव के अच्छी शिक्षा प्रदान करे ताकि वे आगे चल कर देश के अच्छे नागरिक बन सके । देश की उन्नति और उपलब्धियों को साकार कर सके । कहा भी गया है - बिन गुरु ज्ञान कहाँ से पाऊ । सविधान के मौलिक अधिकार के मुताबिक भी छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है । आज शिक्षा प्रदान करने में निजी संस्थाओ का अत्यन्त प्रसार हुआ है लिकिन हमारे देश में ग्रामीण क्षेत्र के गरीब बच्चे किसी भी संसथान में शिक्षा ग्रहण करने में विवश है । उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वे जीवन की मूलभूत आवश्कताओ को पूर्ण करने में भी असमर्थ है । ऐसी स्थिति में वे किसी भी शिक्षण संसथान का खर्च कैसे वहन कर सकते है ? अतः ऐसी स्थिति में निजी शिक्षण संस्थानों की भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे ग्रामीण तबके के गरीब छात्रों की फीस एवं अन्य सुविधाए प्रदान करे । यह सभी जानते है कि जब तक सम्पूर्ण समाज शिक्षित नहीं होगा तब तक देश अपेक्षित प्रगति नहीं कर सकता ।


संस्थापक
गजेन्द्र प्रसाद शुक्ल


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